अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न - आरबीआई - Reserve Bank of India

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FAQs on Non-Banking Financial Companies

Liquid Asset requirement

A. The securities held on behalf of and NBFC, in a bank’s Constituents’ SGL Account can be reckoned towards compliance of requirements of Section 45IB. The securities are required to be deposited with one bank branch and at one place only for the purpose of adequate control. Hence, if an NBFC holds securities with its designated bank branch in its Constituents’ SGL Account, it would be necessary for the company to lodge its physical securities also with the same bank branch.

कोर निवेश कंपनियां

कोर निवेश कंपनियां (सीआईसी)

उत्तर: पंजीकृत सीआईसी जिनकी आस्ति <रु 500 करोड़ है ऐसे गैर-प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण गैर-बैंकिंग वित्तीय (जमाराशि स्वीकार नहीं करने वाली या धारण करने वाली) कंपनी विवेकपूर्ण मानदंड (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2015 के अनुसार 0.25% के मानक आस्ति प्रावधान को बनाए रखेंगे और >= रु 500 करोड़ आस्ति वाले मामले में विनिर्दिष्ट के अनुसार 0.40% के मानक आस्ति प्रावधान को बनाए रखेंगे जो प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण गैर-बैंकिंग वित्तीय (जमाराशि स्वीकार नहीं करने वाली या धारण करने वाली) कंपनी विवेकपूर्ण मानदंड (रिज़र्व बैंक) निदेश, 2015 में निर्दिष्ट के अनुसार लागू होगा।

भारत में विदेशी निवेश

III. अन्य प्रतिभूतियों में निवेश

उत्तर: निवेश माध्यम’ का अर्थ है ऐसी एंटीटी से है जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड अथवा इस प्रयोजन के लिए नामित किसी अन्य प्राधिकारी द्वारा निर्मित संबन्धित विनियमों के तहत पंजीकृत और विनियमित है। फेमा 20(आर) की अनुसूची 8 के प्रयोजन के लिए निवेश माध्यम भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (REITs) विनियमावली, 2014 द्वारा प्रशासित रियल इस्टेट निवेश ट्रस्ट (REITs), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (InvIts) विनियमावली, 2014 द्वारा प्रशासित इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (AIFS) विनियमावली, 2012 द्वारा प्रशासित अल्टरनेटिव निवेश निधियाँ इसमें शामिल हैं । इसमें भूतपूर्व सेबी (उद्यम पूंजी निधि) विनियमावली, 1996 के अंतर्गत पंजीकृत उद्यम पूंजी निधि शामिल नहीं है।

बाह्य वाणिज्यिक उधार(ईसीबी) तथा व्यापार ऋण

के. विविध

उत्तर: हां। मौजूदा मानदंडों के अंतर्गत ईसीबी की मूल राशि तथा ब्याज, दोनों को इक्विटि में परिवर्तित करने की अनुमति है। यह अनुमति “बाह्य वाणिज्यिक उधार, व्यापार ऋण, तथा संरचित प्रतिबद्धता” पर दिनांक 26 मार्च 2019 के मास्टर निदेश सं. 5 के पैराग्राफ 7.4 में दिए गए अनुसार यथालागू शर्तों के अधीन होगी।

एनबीएफसी के बारे में आपके जानने योग्य संपूर्ण जानकारी

D. जमाराशियों की परिभाषा, जमाराशियां स्वीकार करने योग्य/अयोग्य संस्थाएं और उनसे संबंधित मामले

नहीं। को-ऑप. क्रेडिट सोसायटी जनता से जमाराशियां स्वीकार नहीं कर सकती। वह अपने उपनियमों के तहत निर्धारित सीमा तक ही अपने सदस्यों से जमाराशियां स्वीकार कर सकती हैं।

भारत में विदेशी निवेश

III. अन्य प्रतिभूतियों में निवेश

उत्तर: किसी निवेश माध्यम जिसका प्रयोजक अथवा प्रबंधक अथवा निवेश प्रबंधक का (i) निवासी भारतीय नागरिकों के पास स्वामित्व तथा नियंत्रण नहीं है अथवा (ii) उसका स्वामित्व तथा नियंत्रण भारत के बाहर निवास करने वाले व्यक्तियों के पास है द्वारा भारतीय कंपनी अथवा एलएलपी में किया गया निवेश निवेश प्राप्त कर्ता कंपनी अथवा एलएलपी, जैसी स्थिति हो, के लिए अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा।

रिटेल डायरेक्ट योजना

निवेश और खाता धारिता से संबंधित प्रश्न

आरबीआई के पास रिटेल डायरेक्ट गिल्ट (आरडीजी) खाता खोलने और उसे बनाए रखने के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। प्राथमिक नीलामियों में बोलियां जमा करने के समय आरबीआई द्वारा कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि, अपनी खरीद की फंडिंग करते समय लागू पेमेंट गेटवे चार्ज निवेशक को वहन करना होगा।

देशी जमा

IV. शेयरों और डिबेंचरों की जमानत पर अग्रिम

विद्युत प्रभारों का भुगतान, सीमा शुल्क, किराये पर खरीद /पट्टा किराया किस्तों, प्रतिभूतियों की बिक्री और अन्य प्रकार के वित्तीय निभाव से संबंधित बिलों की बैंकों को बट्टे पर भुनाई नहीं करनी चाहिए।

भारतीय मुद्रा

ड़) जाली नोट/जालसाजी

जिस किसी नोट में असली भारतीय करेंसी नोट की विशेषताएँ नहीं पाई जाती हैं वह संदिग्ध जाली नोट, प्रतिरूपित नोट अथवा नकली नोट वह नोट होता है ।

FAQs on Non-Banking Financial Companies

Liquid Asset requirement

Most of the companies are unitary entities. They function from the place of their Registered Office. Some of the large sized companies as also some others may intend to keep the securities at metropolitan centres for operational advantages. The place where the securities are held could be outside the jurisdiction of the concerned Regional Office of RBI because the jurisdictional areas are decided on the basis of place of location of the Registered Office of the companies. In such cases, it is imperative for the Regional Offices to know the place where the securities are being kept.

कोर निवेश कंपनियां

कोर निवेश कंपनियां (सीआईसी)

उत्तर: हाँ, सीआईसी के वर्तमान निर्देशों के अनुसार, उन्हें मनी मार्केट म्यूचुअल फंड सहित मनी मार्केट लिखत में निवेश करने की अनुमति है। चूंकि लिक्विड फंड भी म्यूचुअल फंड हैं, जिनमें अंतर्निहित मनी मार्केट लिखत हैं; सीआईसी को अपने अधिशेष धन को लिक्विड फंड योजनाओं में भी निवेश करने की अनुमति है।

बाह्य वाणिज्यिक उधार(ईसीबी) तथा व्यापार ऋण

के. विविध

उत्तर: हां। ईसीबी का इक्विटि में आंशिक परिवर्तन करने के लिए मुक्त रूप से अनुमति तब ही दी जाएगी जब ईसीबी के रुप में रहनेवाली शेष राशि ईसीबी संबंधी सभी दिशानिर्देशों का अनुपालन करती हो।

एनबीएफसी के बारे में आपके जानने योग्य संपूर्ण जानकारी

D. जमाराशियों की परिभाषा, जमाराशियां स्वीकार करने योग्य/अयोग्य संस्थाएं और उनसे संबंधित मामले

नहीं। इन समितियों का गठन वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए होता है और वे केवल अपने सदस्यों से ही जमाराशियां स्वीकार कर सकती है, न कि जनता से।

रिटेल डायरेक्ट योजना

निवेश और खाता धारिता से संबंधित प्रश्न

प्रतिभूतियों को निपटान तिथि पर आपके रिटेल डायरेक्ट खाते में जमा किया जाएगा, जो आमतौर पर व्यापार तिथि/नीलामी तिथि के बाद का कार्य दिवस है।

देशी जमा

IV. शेयरों और डिबेंचरों की जमानत पर अग्रिम

गैर-बैंकिंग गैर-वित्तीय कंपनियों की सार्वजनिक जमाराशि योजनाओं के अंतर्गत बैंकों द्वारा अपनी निधियों के निवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं है, परंतु ऐसी कंपनियों की सार्वजनिक जमाराशि योजना में किया गया निवेश बैंकों द्वारा अपने तुलनपत्र में तथा बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 और भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अंतर्गत भेजी गयी विवरणियों में ऋण/अग्रिम के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए।

भारतीय मुद्रा

ड़) जाली नोट/जालसाजी

जाली नोट की पहचान असली भारतीय करेंसी नोट में मौजूद सुरक्षा विशेषताओं के आधार पर की जा सकती है । नोट को देखने, छूने तथा झुकाने से ये विशेषताएँ आसानी से पहचानी जा सकती हैं ।

कोर निवेश कंपनियां

कोर निवेश कंपनियां (सीआईसी)

उत्तर: हां, कंपनी जो एक सीआईसी है और जिसने अपने पिछले लेखापरीक्षित वार्षिक वित्तीय विवरण के अनुसार 100 करोड़ रुपये का तुलनपत्र आकार हासिल किया है, को सीआईसी-एसआई के रूप में पंजीकरण के लिए बैंक में आवेदन करना आवश्यक है, बशर्ते प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण सीआईसी के रूप में पहचाने जाने के लिए अन्य शर्तों को पूरा किया गया हो।

FAQs on Non-Banking Financial Companies

Extent of regulations over NBFCs accepting public deposits and not accepting public deposits

The NBFCs accepting public deposits shall furnish to RBI Certificate from the Auditors regarding solvency of the company in repayment of the deposits as and when the claims arise; Balance Sheet and the Auditors’ Reports submitted to the Board of Directors as also to the Shareholders of the company; Statutory Annual Return on deposits in the First Schedule; Quarterly Return on liquid assets; Half-yearly Return on prudential norms; and a copy of the Credit Rating once a year alongwith one of the Half-yearly Returns on prudential norms as at (v) above.

भारत में विदेशी निवेश

III. अन्य प्रतिभूतियों में निवेश

उत्तर: वैकल्पिक (अल्टरनेटिव) निवेश निधि श्रेणी III जिसे कोई विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है वो केवल उन सिक्युरिटीज अथवा लिखतों में ही पोर्टफोलियो निवेश कर सकती हैं जिनमें अधिनियम तथा उसके अंतर्गत बनाए गए नियमों अथवा विनियमों के अधीन निवेश करने की अनुमति है।

बाह्य वाणिज्यिक उधार(ईसीबी) तथा व्यापार ऋण

के. विविध

उत्तर: नहीं ।

एनबीएफसी के बारे में आपके जानने योग्य संपूर्ण जानकारी

D. जमाराशियों की परिभाषा, जमाराशियां स्वीकार करने योग्य/अयोग्य संस्थाएं और उनसे संबंधित मामले

जी हां, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के जमाकर्ताओं को नामांकन की सुविधा उपलब्ध है। नामांकन की सुविधा के नियम, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45थब में दिए गए हैं। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को बैंक विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 45यक के अंतर्गत बनाये गये बैंकिंग कंपनियां (नामांकन) नियम, 1985 अपनाने को कहा गया है। तदनुसार, गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के जमाकर्ता/ओं को एक व्यक्ति को नामांकित करने की अनुमति दी गई है, जिसे जमाकर्ता/ओं की मृत्यु हो जाने की दशा में गैर बैंकिंग कंपनी जमाराशि लौटा सके। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को सूचित किया गया है कि वे उक्त नियमों में विनिर्दिष्ट किए गए अनुसार फार्म डीए 1 में जमाकर्ताओं द्वारा किए गए नामांकन स्वीकार करें और क्रमश: नामांकन निरस्त किए जाने के लिए फार्म डीए 2 और नामांकन में परिवर्तन करने के लिए फार्म डीए 3 का प्रयोग करें।

रिटेल डायरेक्ट योजना

निवेश और खाता धारिता से संबंधित प्रश्न

नहीं। हालांकि, खरीदी गई प्रतिभूतियां आपके रिटेल डायरेक्ट खाते में धारिता विवरण में प्रतिबिंबित होंगी।

देशी जमा

IV. शेयरों और डिबेंचरों की जमानत पर अग्रिम

बैंक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बांड के आबंटन पत्र निम्नलिखित शर्तों के अधीन खरीद सकते हैं -i. अंतर बैंक लेनदेन को छोड़कर सभी लेनदेन केवल मान्यता प्राप्त शेयर बाज़ारों और पंजीकृत दलालों के माध्यम से किए जाने चाहिए।ii. बांड खरीदते समय बैंक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसे प्रतिभूति का स्पष्ट हक मिलता है तथा द्वितीयक बाजार में उस प्रतिभूति का क्रय-विक्रय किया जा सकता है।iii. इस प्रकार का लेनदेन करने के लिए बैंक को बोर्ड के अनुमोदन से अपना आंतरिक दिशानिर्देश निर्धारित करना चाहिए।

भारतीय मुद्रा

ड़) जाली नोट/जालसाजी

बैंकनोटों की जालसाजी/जाली तथा नकली नोटों का असली नोटों के रूप में उयपयोग करना/जाली या नकली बैंकनोट रखने/बैंक नोटों की जालसाजी अथवा नकली बनाने के लिए उपकरणों या सामग्री को रखना/ बैंकनोट के समान दिखने वाले दस्तावेज़ का उपयोग करना अथवा बनाना भारतीय दंड संहिता की धारा 489ए से 489ई के तहत अपराध है तथा इसके लिए न्‍यायालयों द्वारा जुर्माना लगाया जा सकता है या सात साल से लेकर आजीवन कारावास दिया जा सकता है अथवा दोनों सजाएं दी जा सकती हैं, जो किए गए अपराध पर निर्भर होंगी ।

भारत सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), 1967 के तहत उच्च गुणवत्‍ता वाली प्रतिरूपित भारतीय करेंसी संबंधी अपराधों संबंधी अन्वेषण नियम, 2013 तैयार किया है । अधिनियम की तीसरी अनुसूची में उच्च गुणवत्‍ता वाले प्रतिरूपित भारतीय करेंसी नोट को परिभाषित किया गया है । उच्‍च गुणवत्‍ता वाले प्रतिरूपित भारतीय नोट के उत्‍पादन, तस्करी करने या संचरण की गतिविधि को यूएपीए, 1967 के दायरे में लाया गया है ।

FAQs on Non-Banking Financial Companies

Extent of regulations over NBFCs accepting public deposits and not accepting public deposits

The NBFCs except RNBCs not accepting/holding public deposits are not required to submit to RBI their Statutory Returns in the First Schedule or the Balance Sheet or the Quarterly Liquid Asset Return or the Half-yearly Prudential Norm Return. However, all the NBFCs (other than those exempted - see answer to question No. 1) are required to be Registered with RBI and and also make sure that they continue to be eligible to remain Registered. RBI has powers to cause Inspection of the Books of any company and call for any other information about its business activities. For this purpose, the NBFCs are required to furnish the information in respect of any change in the composition of their Board of Directors, address of the company and its Directors and the name/s of its Auditors.

भारत में विदेशी निवेश

IV. रिपोर्टिंग में विलंब

उत्तर: 7 नवंबर 2017 को अथवा उसके बाद किए गए लेनदेन के मामलों में रिपोर्टिंग करने में विलंब होने पर रिपोर्टिंग पर मास्टर निदेश के भाग IV में दिए गए अनुसार रिपोर्टों को फ़ाइल करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति/ एंटीटी पर विलंब से प्रस्तुति के लिए लगाए गए शुल्क का भुगतान करने का दायित्व होगा। एलएसएफ़ का भुगतान करना कंपाउंडिंग क्रियाविधि से गुजरे बिना रिपोर्टिंग में हुए विलंब को नियमित करने का एक अतिरिक्त विकल्प है।

बाह्य वाणिज्यिक उधार(ईसीबी) तथा व्यापार ऋण

भाग II: व्यापार ऋण (टीसी)

उत्तर: एडी बैंक विदेशी मुद्रा में समुद्रपारीय उधारदाताओं से अल्पावधि व्यापार वित्त का लाभ उठाने के लिए अपने ग्रहकों की ओर से एसबीएलसी जारी कर सकते हैं लेकिन इस शर्त के अधीन कि इस प्रकार से जारी की गई एसबीएलसी समय-समय पर संशोधित “गारंटियां तथा सहस्वीकृतियां” पर बैंकिंग विनियमन विभाग के दिनांक 1 जुलाई 2015 के मास्टर परिपत्र सं.डीबीआर.सं.डीआईआर.बीसी.11/13.03.00/2015-16 में निहित प्रावधानों का अनुपालन करती हो ।

एनबीएफसी के बारे में आपके जानने योग्य संपूर्ण जानकारी

D. जमाराशियों की परिभाषा, जमाराशियां स्वीकार करने योग्य/अयोग्य संस्थाएं और उनसे संबंधित मामले

गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों जिसे भारतीय रिज़र्व बैंक से पंजीकरण प्रमाण पत्र प्राप्त करना है परंतु ऐसा किए बगैर कार्य करना कानून का उल्लंघन है। ऐसी कंपनियों पर भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। ऐसी संस्थाओं की पहचान हेतु, भारतीय रिज़र्व बैंक के पास सूचना के अनेक स्रोत है। इसमें बाजार आसूचना, प्रभावित पार्टियों से प्राप्त शिकायतें, औद्योगिक स्रोत तथा गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनी लेखा परीक्षकों का रिपोर्ट (रिजर्व बैंक) निदेश 2008 के अनुसार सांविधिक लेखा परीक्षकों द्वारा प्रस्तुत अपवाद रिपोर्ट शामिल है। इसके अतिरिक्त प्रत्येक तिमाही सभी केन्द्र शासित प्रदेश /राज्यों में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा राज्य स्तरीय समन्वय समिति (एसएलसीसी) आयोजित की जाती है। एसएलसीसी की अध्यक्षता अब संबंधित राज्य के मुख्य सचिव/ केन्द्र साशित प्रदेश के प्रशासक द्वारा की जाती है तथा सदस्यों के रूप में भारतीय रिज़र्व बैंक के अलावा, एमसीए/ आरओसी के क्षेत्रीय निदेशक, सेबी का स्थानीय युनिट, चिट रजिस्ट्रार, आइसीएआइ, राज्य पुलिस का आर्थिक अपराध ईकाइ तथा राज्य सरकार के गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय के अधिकारी होते है। जैसा कि वित्तीय क्षेत्र के सभी संबंधित विनियामक तथा प्रवर्तक ऐजेंसिया एसएलसीसी में भाग लेते है, अत: इससे सूचना का आदान प्रदान शीघ्रता से होगा तथा अप्राधिकृत और संदेहजनक कारोबार के माध्यम से सार्वजनिक जमाराशियों को जुटाने में संलिप्त संस्थाओं के विरूद्ध नियत समय में प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।

रिटेल डायरेक्ट योजना

निवेश और खाता धारिता से संबंधित प्रश्न

प्रतिभूतियों को आरबीआई के साथ गिल्ट खाते में रखा जाएगा।

देशी जमा

IV. शेयरों और डिबेंचरों की जमानत पर अग्रिम

ऋणों /अग्रिमों की प्रतिभूति के रूप में बैंकों द्वारा स्वीकृत शेयरों /डिबेंचरों /बांडों का मूल्य निर्धारण मौजूदा बाजार मूल्य के आधार पर किया जाना चाहिए।

भारतीय मुद्रा

ड़) जाली नोट/जालसाजी

जाली नोट रखने मात्र से सजा नहीं होती है । किसी बैंक नोट के जाली अथवा प्रतिरूपित होने के बारे में जानकारी होने या ऐसा मानने के पीछे कारण होने, और उसे असली नोट की तरह प्रयोग करने का इरादा होने या उसे असली नोट की तरह प्रयोग किया जा सकने की जानकारी के साथ जाली या प्रतिरूपित बैंकनोट रखना भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 489सी के तहत दंडनीय है ।

FAQs on Non-Banking Financial Companies

Repayment of matured deposits

There had been instances when some companies had not paid matured deposits on due dates and such claims have been honoured after some delay. The companies did not pay any interest for the delayed period in the absence of any specific provisions in the Reserve Bank Directions in this regard in the past. A provision has, therefore, been inserted subsequently in the Non-Banking Financial Companies Acceptance of Public Deposits (Reserve Bank) Directions dated 31.1.1998 to the effect that interest is payable to the depositors only in case the company has delayed the repayment of matured deposits, from the date of receipt of such claim by the company or the date of maturity of the deposit whichever is later, till the date of actual payment. If the depositor has lodged his claim after the date of maturity, the company would be liable to pay interest for the period from the date of claim till the date of repayment. In other words, for the period between the date of maturity and the date of claim it is the discretion of the company to pay interest.

भारत में विदेशी निवेश

IV. रिपोर्टिंग में विलंब

उत्तर: एलएसएफ़ का भुगतान करना कंपाउंडिंग क्रियाविधि से गुजरे बिना रिपोर्टिंग में हुए विलंब को नियमित करने के लिए एक अतिरिक्त सुविधा है। तथापि इसका यह अर्थ नहीं है कि आवेदक कंपाउंडिंग के लिए आवेदन नहीं कर सकता है। 7 नवंबर 2017 को अथवा उसके बाद किए गए लेनदेन के लिए आवेदक को दोनों विकल्प उपलब्ध हैं।

बाह्य वाणिज्यिक उधार(ईसीबी) तथा व्यापार ऋण

भाग II: व्यापार ऋण (टीसी)

उत्तर: एडी बैंकों को एडी बैंकों/ रिज़र्व बैंक के क्षेत्रीय कार्यालयों द्वारा विलंबित आयात देयताओं के निपटान के लिए प्रदान की गई सभी अनुमतियों की रिपोर्ट करनी होती है।

एनबीएफसी के बारे में आपके जानने योग्य संपूर्ण जानकारी

D. जमाराशियों की परिभाषा, जमाराशियां स्वीकार करने योग्य/अयोग्य संस्थाएं और उनसे संबंधित मामले

नहीं। प्रोप्राइटरशिप/भागीदारी कंपनियाँ अनिगमित निकाय हैं। अतएव उन्हें भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के तहत जनता से जमाराशियां स्वीकार करने से प्रतिबंधित किया है।

देशी जमा

IV. शेयरों और डिबेंचरों की जमानत पर अग्रिम

हाँ. बैंक कंपनियों को एक वर्ष की अधिकतम अवधि के लिए प्रत्याशित इक्विटी प्रवाह /निर्गम और अपरिवर्तनिय डिबेंचर, बाह्य वाणिज्यिक उधार, ग्लोबल डिपॉजिटरी रसीदों से प्राप्त होने वाली राशि तथा / या विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के रूप में प्राप्त होने वाली निधि को ध्यान में रखते हुए ‘ब्रिज लोन’ स्वीकृत कर सकते हैं, बशर्ते बैंक इस बात से संतुष्ट हो कि उधारकर्ता कंपनी ने उपर्युक्त संसाधन /निधि जुटाने के लिए पक्की व्यवस्था की है। बैंक द्वारा स्वीकृत ब्रिज लोन पूंजी बाजार में बैंक के एक्सपोज़र की 5 प्रतिशत की निर्धारित उच्चतम सीमा के भीतर होगा।

रिटेल डायरेक्ट योजना

निवेश और खाता धारिता से संबंधित प्रश्न

सीएसजीएल, यानी घटकों की सहायक सामान्य लेजर खाता, इसका अर्थ है ऐसे एजेंट के घटकों की ओर से एक एजेंट द्वारा आरबीआई के साथ खोला गया और रखा गया प्रतिभूति खाता, अर्थात आरबीआई के साथ एक एजेंट द्वारा अपने घटकों की ओर से प्रतिभूतियों को रखने के लिए खोला गया खाता। घटकों को गिल्ट खाता धारकों (जीएएचएस) के रूप में जाना जाता है।

भारतीय मुद्रा

ड़) जाली नोट/जालसाजी

भारतीय रिज़र्व बैंक काफी मात्रा में नकद राशि संभालने वाले व्यक्तियों, जैसे बैंकों/उपभोक्ता मंचों/व्यापारिक संगठनों/शैक्षणिक संस्थानों/पुलिस पेशेवरों, के लिए बैंकनोटों की सुरक्षा विशेषताओं की प्रामाणिकता संबंधी प्रशिक्षण सत्र आयोजित करता है । इन प्रशिक्षण सत्रों के अतिरिक्त, बैंकनोटों की सुरक्षा विशेषताओं से संबंधित जानकारी बैंक की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है ।

FAQs on Non-Banking Financial Companies

Repayment of matured deposits

In terms of section 45QA of the Reserve Bank of India Act, 1934, where an NBFC fails to repay any deposit in accordance with the agreed terms and conditions, the Company Law Board can order the company to make repayment of such deposit forthwith or within such time and subject to such conditions as may be specified in the order. The aggrieved depositor is required to submit an application in the Form prescribed by them together with the requisite fee, to the concerned bench of the Company Law Board mentioned in the Deposit Application Form and seek an Order against the erring company . Apart from above, the depositor can also approach the District/State/National Level Consumers Disputes Redressal Forum for relief against the erring company.

भारत में विदेशी निवेश

IV. रिपोर्टिंग में विलंब

उत्तर: विदेशी मुद्रा प्रबंध अधिनियम, 1999 के अंतर्गत रिपोर्टिंग संबंधी मास्टर निदेश में रिपोर्टिंग अपेक्षाओं को निर्धारित किया गया है।

एनबीएफसी के बारे में आपके जानने योग्य संपूर्ण जानकारी

D. जमाराशियों की परिभाषा, जमाराशियां स्वीकार करने योग्य/अयोग्य संस्थाएं और उनसे संबंधित मामले

यह इस बात पर निर्भर करता है कि क्या पैसा भविष्य में आभूषणों की आपूर्ति के लिए बतौर अग्रिम लिया जा रहा है या पैसा ब्याज के साथ वापस करने के वादे के साथ लिया गया है। ज्वैलरी शॉप द्वारा करार की अवधि के अंत में आभूषणों की आपूर्ति के लिए किस्तों में पैसा लेना जमाराशि लेना नहीं है। उसे जमाराशियां तभी माना जायेगा यदि ज्वैलरी शॉप द्वारा प्राप्त पैसे की वापसी के समय मूलधन के साथ-साथ ब्याज देने का वादा भी किया गया हो।

देशी जमा

IV. शेयरों और डिबेंचरों की जमानत पर अग्रिम

शेयरों, डिबेंचरों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के बांडों की जमानत पर व्यक्तियों को स्वीकृत ऋण / अग्रिम, यदि प्रतिभूति भैतिक रूप में हो तो 10 लाख रुपये और यदि प्रतिभूति ‘अमूर्त’ रूप में हो तो 20 लाख रुपये से अधिक नहीं होना चाहिए। आरंभिक सार्वजनिक प्रस्ताव (आइपीओ) में अभिदान के लिए व्यक्ति को 10 लाख रुपये तक अधिकतम वित्त स्वीकृत किया जा सकता है। परंतु, बैंक को अन्य कंपनियों के आइपीओ में निवेश के लिए कंपनियों को वित्त उपलब्ध नहीं करना चाहिए। बैंक कर्मचारी स्टॉक विकल्प योजना (इएसओपी) के अंतर्गत कर्मचारियों को अपनी कंपनियों के शेयर खरीदने के लिए शेयरों के क्रय मूल्य के 90 प्रतिशत या 20 लाख रुपये, इनमें जो भी कम हो, तक अग्रिम स्वीकृत कर सकते हैं। आइपीओ में अभिदान के लिए व्यक्तियों को ऋण देने के लिए गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को वित्त उपलब्ध नहीं कराया जाना चाहिए। आइपीओ में अभिदान के लिए बैंक द्वारा स्वीकृत ऋणों / अग्रिमों को पूंजी बाजार का एक्सपोज़र मानना चाहिए।

रिटेल डायरेक्ट योजना

निवेश और खाता धारिता से संबंधित प्रश्न

हां, प्रतिभूतियों को किसी रिश्तेदार/मित्र/पात्रता मानदंड को पूरा करने वाले किसी भी व्यक्ति को उपहार में दिया/हस्तांतरित किया जा सकता है। बांड को सरकारी प्रतिभूति अधिनियम, 2006 और सरकारी प्रतिभूति विनियम, 2007 के प्रावधानों के अनुसार स्थानांतरित किया जाएगा।

भारतीय मुद्रा

च) सिक्के

वर्तमान में भारत में 50 पैसे, एक रुपया, दो रुपये, पाँच रुपये, दस रुपये तथा बीस रुपये के मूल्यवर्ग के सिक्के जारी किए जा रहे हैं । 50 पैसे तक के सिक्कों को “छोटे सिक्के” कहा जाता है तथा एक रुपया और इससे अधिक के सिक्कों को “रुपया सिक्का” कहा जाता है । सिक्‍का निर्माण अधिनियम, 2011 के तहत ₹1000 तक के मूल्यवर्ग के सिक्के जारी किए जा सकते हैं ।

FAQs on Non-Banking Financial Companies

Repayment of matured deposits

An NBFC accepts deposits under a mutual contract with its depositors. In case a depositor requests for pre-mature payment, Reserve Bank of India has prescribed Regulations for such an eventuality in the Non-Banking Financial Companies Acceptance of Public Deposits (Reserve Bank) Directions, 1998. However, premature repayment of deposits is the sole discretion of the company concerned. In other words, if the company agrees to pre-pay deposits at the request of the depositor, the depositor and the company are deemed to have mutually agreed to amend the terms of contract. On the above analogy, if a company intends to pre-pay deposits, it can seek the consent of the depositors for such pre-mature repayment and if the depositors agree, a company can do so. It does not involve prior approval of RBI so long as the provisions relating to minimum period regarding repayment of deposits are not violated.

भारत में विदेशी निवेश

IV. रिपोर्टिंग में विलंब

उत्तर: फेमा, 1999 के तहत जारी की गई अधिसूचना के आधार पर विदेशी निवेश किया जा सकता है।

एनबीएफसी के बारे में आपके जानने योग्य संपूर्ण जानकारी

D. जमाराशियों की परिभाषा, जमाराशियां स्वीकार करने योग्य/अयोग्य संस्थाएं और उनसे संबंधित मामले

ऐसे अनिगमित निकाय, यदि जनता से जमाराशियां लेते हुए पाए जाते है तो उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इसके अलावा एनबीएफसी के किसी भी अनिगमित निकाय से संबद्ध होने को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा प्रतिबंधित किया गया है। यदि एनबीएफसी भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम का उल्लंघन करते हुए जमाराशियां स्वीकार करने वाली किसी प्रोप्राइटरशिप/भागीदारी फर्म से जुड़ाव रखती है, तो उसके खिलाफ आपराधिक कानून या जमाकर्ता हित संरक्षण (वित्तीय संस्थाओं में) अधिनियम, यदि राज्य सरकार द्वारा पारित हो, के तहत अभियोग चलाया जा सकता है।

रिटेल डायरेक्ट योजना

निवेश और खाता धारिता से संबंधित प्रश्न

नहीं। एनएसडीएल/सीडीएसएल वाले डीमेट खाते में धारिता आरडीजी खाते में धारिता से अलग होती है। एक ही समय में दोनों खातों को बनाए रख सकते हैं।

देशी जमा

IV. शेयरों और डिबेंचरों की जमानत पर अग्रिम

शेयरों की जमानत /गारंटी जारी करने के आधार पर दिए गए सभी अग्रिमों के लिए 50 प्रतिशत का एकसमान मार्जिन निर्धारित किया गया है। इस 50 प्रतिशत के मार्जिन के भीतर पूंजी बाज़ार परिचालनों के संबंध में बैंकों द्वारा जारी गारंटियों के मामले में, कम से कम 25 प्रतिशत का नकद मार्जिन होना चाहिए।

भारतीय मुद्रा

च) सिक्के

30 जून 2011 से पच्चीस (25) पैसे के सिक्कों को संचलन से बाहर कर दिया गया है और इसलिए ये अब ये वैध मुद्रा नहीं हैं । 25 पैसे से कम मूल्यवर्ग के सिक्के बहुत पहले संचलन से वापस ले लिए गए थे । सिक्‍का निर्माण अधिनियम, 2011 के तहत भारत सरकार द्वारा ढाले गए तथा समय-समय पर भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा संचलन के लिए जारी अन्य सभी मूल्यवर्गों के विभिन्न आकार, विषय-वस्तु (थीम) तथा रूपरेखा (डिजाइन) के सिक्के वैध मुद्रा के रूप में जारी हैं ।

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