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मार्च 03, 2008
हिंदी सामग्री शीघ्र ही अद्यतन की जाएगी।
Guidelines on Managing Risks and Code of Conduct in Outsourcing of Financial Services by banks
RBI/2007-2008/254 DBOD.NO.BP. 64 / 21.04.158/ 2007-08 March 03, 2008 All Scheduled Commercial Banks (excluding RRBs) Dear Sir, Guidelines on Managing Risks and Code of Conduct in Outsourcing of Financial Services by banks Please refer to para 5.10(c) of our circular RBI/2006/167 DBOD.No.BP.40/ 21.04. 158 /2006-07 dated November 3, 2006 on the captioned subject. 2. The time limit given to the customer for preferring their complaints/grievances as specified in the above
RBI/2007-2008/254 DBOD.NO.BP. 64 / 21.04.158/ 2007-08 March 03, 2008 All Scheduled Commercial Banks (excluding RRBs) Dear Sir, Guidelines on Managing Risks and Code of Conduct in Outsourcing of Financial Services by banks Please refer to para 5.10(c) of our circular RBI/2006/167 DBOD.No.BP.40/ 21.04. 158 /2006-07 dated November 3, 2006 on the captioned subject. 2. The time limit given to the customer for preferring their complaints/grievances as specified in the above
फ़रवरी 18, 2008
अपने ग्राह को जानिए (केवाइसी) मानदंड /धनशोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी)
आरबीआइ/2007-08/239 बैंपविवि. एएमएल. बीसी. सं. 63 /14.01.001/2007-08 18 फरवरी 2008 29 माघ 1929 (शक)सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक /वित्तीय संस्थाएं(क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर)महोदय ‘अपने ग्राह को जानिए’ (केवाइसी) मानदंड /धनशोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी) 29 नवंबर 2004 के हमारे परिपत्र बैंपविवि. सं. एएमएल. बीसी.58/14.01.001/2004-05 द्वारा बैंकों को सूचित किया गया था कि ग्राहक स्वीकृति नीति अपनाने तथा उसे लागू करने का यह परिणाम नहीं
आरबीआइ/2007-08/239 बैंपविवि. एएमएल. बीसी. सं. 63 /14.01.001/2007-08 18 फरवरी 2008 29 माघ 1929 (शक)सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक /वित्तीय संस्थाएं(क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर)महोदय ‘अपने ग्राह को जानिए’ (केवाइसी) मानदंड /धनशोधन निवारण (एएमएल) मानक/आतंकवाद के वित्तपोषण का प्रतिरोध (सीएफटी) 29 नवंबर 2004 के हमारे परिपत्र बैंपविवि. सं. एएमएल. बीसी.58/14.01.001/2004-05 द्वारा बैंकों को सूचित किया गया था कि ग्राहक स्वीकृति नीति अपनाने तथा उसे लागू करने का यह परिणाम नहीं
फ़रवरी 13, 2008
बैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 24 - सांविधिक चलनिधि अनुपात बनाये रखना
आरबीआइ/2007-08/236 संदर्भ : बैंपविवि. आरईटी. बीसी. 62/12.02.001/2007-08 13 फरवरी 2008 24 माघ 1929 (शक) सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) आदरणीय महोदय/महोदयाबैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 24 - सांविधिक चलनिधि अनुपात बनाये रखना कृपया उपर्युक्त विषय पर 21 अक्तूबर 1997 का हमारा परिपत्र बैंपविवि. सं. बीसी. 137/ 12.02.001/ 97-98 देखें ।बैंककारी विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2007 के स्थान पर बैंककारी विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2007, 23 जनवरी 2
आरबीआइ/2007-08/236 संदर्भ : बैंपविवि. आरईटी. बीसी. 62/12.02.001/2007-08 13 फरवरी 2008 24 माघ 1929 (शक) सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) आदरणीय महोदय/महोदयाबैंककारी विनियमन अधिनियम 1949 की धारा 24 - सांविधिक चलनिधि अनुपात बनाये रखना कृपया उपर्युक्त विषय पर 21 अक्तूबर 1997 का हमारा परिपत्र बैंपविवि. सं. बीसी. 137/ 12.02.001/ 97-98 देखें ।बैंककारी विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2007 के स्थान पर बैंककारी विनियमन (संशोधन) अधिनियम, 2007, 23 जनवरी 2
फ़रवरी 12, 2008
आढ़तिया (फैक्टरिडग) कंपनियों को बैंक वित्त
आरबीआइ/2007-08/235 बैंपविवि. बीपी. बीसी. सं. 60 /08.12.01/2007-08 12 फरवरी 2008 23 माघ 1929 (शक) अनुसूचित वाणिज्य बैंकों के अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) महोदयआढ़तिया (फैक्टरिडग) कंपनियों को बैंक वित्त कृपया आप गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को बैंक वित्त पर 2 जुलाई 2007 का हमारा मास्टर परिपत्र सं. आरबीआइ/2007-08/52 बैंपविवि. बीपी. बीसी. सं. 13/08.12.01/2007-08 देखें। परिपत्र के पैरा 5.1 (i) के अनुसार कुछ विशिष
आरबीआइ/2007-08/235 बैंपविवि. बीपी. बीसी. सं. 60 /08.12.01/2007-08 12 फरवरी 2008 23 माघ 1929 (शक) अनुसूचित वाणिज्य बैंकों के अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) महोदयआढ़तिया (फैक्टरिडग) कंपनियों को बैंक वित्त कृपया आप गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को बैंक वित्त पर 2 जुलाई 2007 का हमारा मास्टर परिपत्र सं. आरबीआइ/2007-08/52 बैंपविवि. बीपी. बीसी. सं. 13/08.12.01/2007-08 देखें। परिपत्र के पैरा 5.1 (i) के अनुसार कुछ विशिष
जनवरी 17, 2008
पूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड - शिक्षा ऋण पर जोखिम भार
आरबीआइ/2007-08/226 बैंपविवि.बीपी. बीसी. सं. 59/21.06.001/2007-08 17 जनवरी 2008 27 पौष 1929 (शक) सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) महोदयपूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड - शिक्षा ऋण पर जोखिम भार कृपया ‘नए पूंजी पर्याप्तता ढांचे के कार्यान्वयन पर दिशानिर्देश’(पैराग्राफ 5.13.3) संबंधी 27 अप्रैल 2007 का हमारा परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 90/20.06.001 तथा ‘मास्टर परिपत्र - पूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड’ (परिपत्र के अनुब
आरबीआइ/2007-08/226 बैंपविवि.बीपी. बीसी. सं. 59/21.06.001/2007-08 17 जनवरी 2008 27 पौष 1929 (शक) सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) महोदयपूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड - शिक्षा ऋण पर जोखिम भार कृपया ‘नए पूंजी पर्याप्तता ढांचे के कार्यान्वयन पर दिशानिर्देश’(पैराग्राफ 5.13.3) संबंधी 27 अप्रैल 2007 का हमारा परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 90/20.06.001 तथा ‘मास्टर परिपत्र - पूंजी पर्याप्तता संबंधी विवेकपूर्ण मानदंड’ (परिपत्र के अनुब
दिसंबर 20, 2007
कंपनीगत सामाजिक उत्तरदायित्व, सतत विकास और गैर-वित्तीय रिपोर्टिंग - बैंकों की भूमिका
आरबीआइ सं. 2007-08/216 बैंपविवि. डीआइआर.बीसी. 58/13.27.00/2007-08 20 दिसंबर 2007 29 अग्रहायण 1929 (शक) सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर)महोदय/महोदयाकंपनीगत सामाजिक उत्तरदायित्व, सतत विकास और गैर-वित्तीय रिपोर्टिंग - बैंकों की भूमिका वर्तमान में, पूरे विश्व-भर में कंपनीगत सामाजिक उत्तरदायित्व, सतत विकास तथा गैर-वित्तीय रिपोर्टिंग के बारे में जागरूकता बढ़ती जा रही है । इसके परिणामस्वरूप सभी प्रकार की संस्थाओं में यह सुनिश्चित करने के लिए संग
आरबीआइ सं. 2007-08/216 बैंपविवि. डीआइआर.बीसी. 58/13.27.00/2007-08 20 दिसंबर 2007 29 अग्रहायण 1929 (शक) सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर)महोदय/महोदयाकंपनीगत सामाजिक उत्तरदायित्व, सतत विकास और गैर-वित्तीय रिपोर्टिंग - बैंकों की भूमिका वर्तमान में, पूरे विश्व-भर में कंपनीगत सामाजिक उत्तरदायित्व, सतत विकास तथा गैर-वित्तीय रिपोर्टिंग के बारे में जागरूकता बढ़ती जा रही है । इसके परिणामस्वरूप सभी प्रकार की संस्थाओं में यह सुनिश्चित करने के लिए संग
दिसंबर 20, 2007
वर्ष 2006-07 से सरकारी क्षेत्र के बैंकों के सांविधिक केंद्रीय लेखा-परीक्षकों तथा शाखा लेखा-परीक्षकों को देय पारिश्रमिक
आरबीआई/2007-08/217 संदर्भ.बैंपर्यवि.एआरएस.सं.बीसी. 07/08.92.001/2007-08 20 दिसंबर 2007   अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, सरकारी क्षेत्र के सभी बैंक तथा प्रबंध निदेशक भारतीय स्टेट बैंक के सहयोगी बैंकमहोदय/महोदया वर्ष 2006-07 से सरकारी क्षेत्र के बैंकों के सांविधिक केंद्रीय लेखा-परीक्षकों तथा शाखा लेखा-परीक्षकों को देय पारिश्रमिक कृपया वर्ष 2006-07 के लिए सरकारी क्षेत्रों के बैंकों सांविधिक केंद्रीय लेखा-परीक्षकों तथा शाखा लेखा-परीक्षकों को देय पारिश्रमिक के संबंध में 6
आरबीआई/2007-08/217 संदर्भ.बैंपर्यवि.एआरएस.सं.बीसी. 07/08.92.001/2007-08 20 दिसंबर 2007   अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, सरकारी क्षेत्र के सभी बैंक तथा प्रबंध निदेशक भारतीय स्टेट बैंक के सहयोगी बैंकमहोदय/महोदया वर्ष 2006-07 से सरकारी क्षेत्र के बैंकों के सांविधिक केंद्रीय लेखा-परीक्षकों तथा शाखा लेखा-परीक्षकों को देय पारिश्रमिक कृपया वर्ष 2006-07 के लिए सरकारी क्षेत्रों के बैंकों सांविधिक केंद्रीय लेखा-परीक्षकों तथा शाखा लेखा-परीक्षकों को देय पारिश्रमिक के संबंध में 6
दिसंबर 14, 2007
पूंजी बाजार में बैंकों का निवेश - म्युच्युअल फंड और अविकल्पी अदायगी प्रतिबद्धताओं (आइपीसी) के निर्गम के लिए बैंकों द्वारा प्रदत्त ऋण
आरबीआइ सं. 2007-08/210 बैंपविवि. डीआइआर.बीसी. 57/13.03.00/2007-08 14 दिसंबर 2007 23 अग्रहायण 1929 (शक) सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) महोदय पूंजी बाजार में बैंकों का निवेश - म्युच्युअल फंड और अविकल्पी अदायगी प्रतिबद्धताओं (आइपीसी) के निर्गम के लिए बैंकों द्वारा प्रदत्त ऋण बैंक यह जानते ही हैं कि पूंजी बाज़ार में बैंकों के एक्सपोज़र पर वर्तमान अनुदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एक्सपोज़र संबंधी मानदंडों पर जारी दिनांक 2 जुलाई, 2007 क
आरबीआइ सं. 2007-08/210 बैंपविवि. डीआइआर.बीसी. 57/13.03.00/2007-08 14 दिसंबर 2007 23 अग्रहायण 1929 (शक) सभी अनुसूचित वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को छोड़कर) महोदय पूंजी बाजार में बैंकों का निवेश - म्युच्युअल फंड और अविकल्पी अदायगी प्रतिबद्धताओं (आइपीसी) के निर्गम के लिए बैंकों द्वारा प्रदत्त ऋण बैंक यह जानते ही हैं कि पूंजी बाज़ार में बैंकों के एक्सपोज़र पर वर्तमान अनुदेशों को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा एक्सपोज़र संबंधी मानदंडों पर जारी दिनांक 2 जुलाई, 2007 क
दिसंबर 06, 2007
हिंदी सामग्री शीघ्र ही अद्यतन की जाएगी।
Prudential Norms for Classification, valuation and operation of investment portfolio by banks
RBI/2007-08/205 DBOD.No.BP.BC.56/21.04.141/2007-08 December 06,2007 The Chairman/Chief Executive Officer All Scheduled Commercial Banks (excluding Local Area Banks and Regional Rural Banks) Dear Sir, Prudential Norms for Classification, valuation and operation of investment portfolio by banks Please refer to our Master Circular DBOD.No.BP.BC.15/21.04.141/2007-08 dated July 2, 2007 on the captioned subject. 2. As per para 1.2.14 of the circular, banks must not invest i
RBI/2007-08/205 DBOD.No.BP.BC.56/21.04.141/2007-08 December 06,2007 The Chairman/Chief Executive Officer All Scheduled Commercial Banks (excluding Local Area Banks and Regional Rural Banks) Dear Sir, Prudential Norms for Classification, valuation and operation of investment portfolio by banks Please refer to our Master Circular DBOD.No.BP.BC.15/21.04.141/2007-08 dated July 2, 2007 on the captioned subject. 2. As per para 1.2.14 of the circular, banks must not invest i
नवंबर 30, 2007
बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा संरचनात्मक क्षेत्र का वित्तपोषण -‘संरचनात्मक क्षेत्र ऋण’ की परिभाषा
आरबीआइ/2007-08/197 बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 52/21.04.048/2007-08 30 नवंबर 2007 9 अग्रहायण 1929 (शक)सभी वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तथा स्थानीय क्षेत्र बैंकों को छोड़कर) तथा चयनित अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएं (एनएचबी, नाबार्ड, एक्ज़िम बैंक, सिडबी, टीएफसीआइ लि. आइएफसीआइ लि., आइआइबीआइ लि.)महोदय बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा संरचनात्मक क्षेत्र का वित्तपोषण -‘संरचनात्मक क्षेत्र ऋण’ की परिभाषा कृपया 16 जून 2004 का हमारा परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 92/
आरबीआइ/2007-08/197 बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 52/21.04.048/2007-08 30 नवंबर 2007 9 अग्रहायण 1929 (शक)सभी वाणिज्य बैंक (क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों तथा स्थानीय क्षेत्र बैंकों को छोड़कर) तथा चयनित अखिल भारतीय वित्तीय संस्थाएं (एनएचबी, नाबार्ड, एक्ज़िम बैंक, सिडबी, टीएफसीआइ लि. आइएफसीआइ लि., आइआइबीआइ लि.)महोदय बैंकों तथा वित्तीय संस्थाओं द्वारा संरचनात्मक क्षेत्र का वित्तपोषण -‘संरचनात्मक क्षेत्र ऋण’ की परिभाषा कृपया 16 जून 2004 का हमारा परिपत्र बैंपविवि. सं. बीपी. बीसी. 92/

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