अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न - आरबीआई - Reserve Bank of India

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विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा (ईईएफसी) खाता

उत्तर: प्राधिकृत व्यापारी श्रेणी-I बैंक अर्थात आर.बी.आई. द्वारा विदेशी मुद्रा का व्यापार करने के लिए प्राधिकृत किए गए बैंक के पास विदेशी मुद्रा में विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा (EEFC) खाता रखा जाता है। यह सुविधा विदेशी मुद्रा में अर्जित की गयी 100 प्रतिशत राशि को निर्यातकों सहित विदेशी मुद्रा अर्जकों को उनके उक्त खाते में जमा करने के लिए दी जाती है ताकि खाता धारकों को विदेशी मुद्रा को रुपये में और रुपये को विदेशी मुद्रा में परिवर्तित न करना पड़े जिससे उनके लेनदेनों की लागत कम हो सके।

उत्तर: सभी श्रेणी के विदेशी मुद्रा अर्जक जैसे व्यक्ति, कंपनियाँ, आदि जो भारत में निवास करते हैं वे विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते खोल सकते हैं।

उत्तर: विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते केवल चालू खाते के रूप में रखे जा सकते हैं । विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खातों पर कोई ब्याज देय नहीं है ।

उत्तर: किसी के द्वारा अर्जित विदेशी मुद्रा की 100 प्रतिशत राशि विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाते में जमा की जा सकती है बशर्ते उक्त खाते में कैलेण्डर माह के दौरान उपचित कुल राशि में से अनुमोदित प्रयोजनों या वायदा प्रतिबध्दताओं की राशि को समायोजित कर बची हुई शेष राशि अनुवर्ती माह के अंतिम दिन या उससे पूर्व रुपए में परिवर्तित की जाए ।

उत्तर : नहीं । विशेष आर्थिक क्षेत्र की इकाईयां विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खाता नहीं खोल सकती हैं। तथापि दिनांक 21 जनवरी 2016 की विदेशी मुद्रा प्रबंध (भारत में निवास करने वाले व्यक्ति के विदेशी मुद्रा खाते) विनियमावली, 2016 के विनियम-4 (डी) में निर्धारित शर्तों के अधीन विशेष आर्थिक क्षेत्र में स्थित कोई इकाई भारत में किसी प्राधिकृत व्यापारी के पास विदेशी मुद्रा खाता खोल सकती है।

उत्तर : हाँ; विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा खातों के परिचालन के लिए चेक सुविधा उपलब्ध है।

उत्तर : (i) सामान्य बैंकिंग चैनल के मार्फत प्राप्त आवक विप्रेषण जिनमें खाताधारक द्वारा विदेशी मुद्रा में लिए गए ऋण की प्राप्त राशि या विदेश से प्राप्त निवेश राशि या विशिष्ट जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए प्राप्त राशि शामिल नहीं है;

(ii) सौ प्रतिशत निर्यात उन्मुख किसी इकाई या (ए) निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र अथवा (बी) सॉफ्टवेयर टेक्नॉलॉजी पार्क अथवा (सी) ईलेक्ट्रानिक हार्डवेयर टेक्नालाजी पार्क की किसी इकाई द्वारा ऐसी ही इकाइयों अथवा घरेलू प्रशुल्क क्षेत्र (DTA) की इकाई को किए गए माल की आपूर्ति के लिए विदेशी मुद्रा में प्राप्त भुगतान;

(iii) देशी प्रशुल्क क्षेत्र (DTA) की किसी इकाई द्वारा विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) में स्थित किसी इकाई को माल की आपूर्ति के लिए विदेशी मुद्रा में प्राप्त भुगतान;

(iv) प्रति (काउंटर) व्यापार के प्रयोजन हेतु प्राधिकृत व्यापारी के पास रखे गए खाते से निर्यातक को प्राप्त भुगतान। (प्रति (काउंटर) व्यापार वह व्यवस्था है, जिसमें रिज़र्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार भारत से निर्यातित माल के मूल्य पर भारत में आयातित माल के मूल्य का समायोजन समाविष्ट है);

(v) माल अथवा सेवाओं के निर्यात के संबंध में निर्यातक द्वारा प्राप्त अग्रिम विप्रेषण;

(vi) भारत में प्राधिकृत व्यापारी के पास Bank for Foreign Economic Affairs, Moscow के खाते में धारित अमरीकी डॉलर में स्टेट क्रेडिट की चुकौती निरूपित करने वाली निधियों में से भारत से माल और सेवाओं के निर्यात के लिए प्राप्त भुगतान;

(vii) किसी व्यावसायिक (प्रोफेशनल) द्वारा अपनी व्यक्तिगत क्षमता में सेवाएं प्रदान करने के लिए प्राप्त निदेशक की फीस, परामर्श फीस, व्याख्यान फीस, मानदेय तथा इसी प्रकार के अन्य अर्जनों सहित व्यावसायिक अर्जन;

(viii) खाते से पूर्व में आहरित अप्रयुक्त विदेशी मुद्रा पुन: जमा करना;

(ix) EEFC खाता धारक निर्यातक द्वारा खाता धारक के आयातक ग्राहक को प्रदान किए गए व्यापार संबंधी ऋण/ अग्रिम (मौजूदा दिशानिर्देशों के अनुपालन के अधीन) की चुकौती निरुपित करने वाली राशि; और

(x) भारत सरकार के विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड द्वारा अनुमोदित प्रायोजित एडीआर/ जीडीआर योजना के तहत निवासी खाता धारक द्वारा धारित शेयरों के एडीआर्स/ जीडीआर्स में रूपांतरण पर प्राप्त विनिवेश आगम राशि।

उत्तर: हाँ, इंटरनेशनल क्रेडिट कार्ड के जरिये प्राप्त विदेशी मुद्रा अर्जन, जिसके लिए विदेशी मुद्रा में प्रतिपूर्ति की गयी है, सामान्य बैंकिंग चैनल के जरिये विप्रेषण के रूप में माना जा सकता है तथा उसे विदेशी मुद्रा अर्जक विदेशी मुद्रा (ईईएफसी) खाते में जमा किया जा सकता है।

उत्तर : i) अनुमत चालू खातेगत लेनदेन [विदेशी मुद्रा प्रबंध (चालू खाता लेनदेन) नियमावली, 2000 के उपबंधों के अनुसार)] तथा अनुमत पूँजी खातेगत लेनदेन [विदेशी मुद्रा प्रबंध (अनुमत पूँजी खाता लेनदेन) नियमावली, 2000 के उपबंधों के अनुसार)] के लिए भारत से बाहर किए गए भुगतान।

ii) 100 प्रतिशत निर्यातोन्मुख इकाई अथवा (ए) निर्यात प्रसंस्करण क्षेत्र अथवा (बी) सॉफ्टवेयर टेक्नॉलॉजी पार्क अथवा (सी) इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेअर टेक्नॉलॉजी पार्क की ईकाई से खरीदी गयी वस्तुओं की लागत के लिए विदेशी मुद्रा में किये गये भुगतान।

iii) भारत सरकार की उस समय प्रचलित विदेश व्यापार नीति के उपबंधों के अनुसार सीमा शुल्क का भुगतान ।

iv) विदेशी मुद्रा प्रबंध (विदेशी मुद्रा में उधार लेना और उधार देना) नियमावली, 2000 के अनुपालन की शर्त पर इस प्रकार का खाता धारित करने वाले निर्यातक द्वारा भारत से बाहर के उसके आयातक ग्राहक को प्रदान किए गए व्यापार संबद्ध ऋण/अग्रिम।

v) भारत के निवासी व्यक्ति को माल/ सेवाओं की आपूर्ति, जिसमें हवाई शुल्क और होटल व्यय का भुगतान शामिल है, के लिए विदेशी मुद्रा में किए गए भुगतान ।

उत्तर : नहीं। ईईएफसी खाते में धारित निधियों में से रुपये में आहरण पर कोई प्रतिबंध नहीं है। तथापि, रुपए में आहरित राशि विदेशी मुद्रा में रूपांतरण तथा खाते में पुन: जमा के लिए पात्र नहीं होगी ।

उत्तर : हाँ, ईईएफसी खाते में शेष राशियों की हेजिंग की जा सकती है। खाताधारकों द्वारा फारवर्ड बेची गयी शेष राशियां डिलिवरी के लिए अलग से रखी जानी हैं। तथापि, संविदाएं रोल-ओवर की जा सकती हैं।

उत्तर : निवासी व्यक्तियों को निवासी रिशतेदारों (कंपनी अधिनियम, 2013 में यथा परिभाषित) को ईईएफसी बैंक खाते में “पहला” अथवा “उत्तरजीवी” आधार पर संयुक्त खाताधारक के रूप में शामिल करने की अनुमति है।

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